Tuesday, April 19, 2016

यात्रा

1
भटके जीव
खोजे  है ठंड़ी छाँव
जीवन गाँव।
2
मन पथिक
अनंत मरिचिका
फंसे मीन-सा ।
 3
देती थकन
मन की अटकन
मिले न थाँव ।
4
ईश की याद
क्यूँ दर्द की राह में
जले दीप-सी।
5
जली प्रेम  लौ
भटकन की आँधी
क्यूँ, गई बुझा।
6
 जीवन साँझ
मन जपे है राम

धुंधला धाम।

सीमा स्‍मृति

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