Tuesday, April 19, 2016

मन

1

मन की बातें

असीमित अनंत

बुझे जो संत।

2

मन के रंग

देखो जग के संग

नयी  तरंग।

3

बदलो सोच

ख़ुशी -तितली,आए

मन बगिया ।

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